पंचांग 15 अगस्त 2038

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 अगस्त 2038 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:01
चंद्रोदय19:34
चंद्रास्त06:23
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1960 · विक्रम (चैत्रादि) 2095
संवत्सर:
कालयुक्त (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मकर 08:24 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 04:43 (16 अग॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 05:30 (17 अग॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 20:52 तक, फिर शतभिषा 22:09 (16 अग॰) तक
योग
शोभन 23:27 तक, फिर अतिगण्ड 22:59 (16 अग॰) तक
करण
बालव 16:31 तक, फिर कौलव 04:43 (16 अग॰) तक, फिर तैतिल 17:03 (16 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04
  • राहु काल17:26 – 19:01
  • यमगंड12:38 – 14:14
  • गुलिक काल15:50 – 17:26

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:16 – 07:51
  • चर(सामान्य)07:51 – 09:27
  • लाभ(शुभ)09:27 – 11:03
  • अमृत(शुभ)11:03 – 12:38
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:14
  • शुभ(शुभ)14:14 – 15:50
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:50 – 17:26
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:26 – 19:01

रात

  • शुभ(शुभ)19:01 – 20:26
  • अमृत(शुभ)20:26 – 21:50
  • चर(सामान्य)21:50 – 23:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:39 (16 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:39 (16 अग॰) – 02:03 (16 अग॰)
  • लाभ(शुभ)02:03 (16 अग॰) – 03:27 (16 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (16 अग॰) – 04:52 (16 अग॰)
  • शुभ(शुभ)04:52 (16 अग॰) – 06:16 (16 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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