पंचांग 10 मई 2039
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 मई 2039 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:03
सूर्यास्त18:59
चंद्रोदय21:14
चंद्रास्त07:36
- मास:
- वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
- संवत्सर:
- सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 03:04 (11 मई) तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 09:24 तक, फिर कृष्ण तृतीया 05:59 (11 मई) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 02:56 (12 मई) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 03:04 (11 मई) तक, फिर मूल 00:46 (12 मई) तक
- योग
- परिघ 08:28 तक, फिर शिव 04:33 (11 मई) तक, फिर सिद्ध 00:56 (12 मई) तक
- करण
- गर 09:24 तक, फिर वणिज 19:39 तक, फिर विष्टि 05:59 (11 मई) तक, फिर बव 16:24 (11 मई) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:56
- राहु काल15:45 – 17:22
- यमगंड09:17 – 10:54
- गुलिक काल12:31 – 14:08
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:03 – 07:40
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:40 – 09:17
- चर(सामान्य)09:17 – 10:54
- लाभ(शुभ)10:54 – 12:31
- अमृत(शुभ)12:31 – 14:08
- काल(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:45
- शुभ(शुभ)15:45 – 17:22
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:22 – 18:59
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:59 – 20:22
- लाभ(शुभ)20:22 – 21:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:45 – 23:07
- शुभ(शुभ)23:07 – 00:30 (11 मई)
- अमृत(शुभ)00:30 (11 मई) – 01:53 (11 मई)
- चर(सामान्य)01:53 (11 मई) – 03:16 (11 मई)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:16 (11 मई) – 04:39 (11 मई)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:39 (11 मई) – 06:02 (11 मई)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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