पंचांग 10 अगस्त 2039

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अगस्त 2039 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:14
सूर्यास्त19:04
चंद्रोदय23:24
चंद्रास्त11:27
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
संवत्सर:
सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 10:22 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 12:02 (11 अग॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 02:37 (11 अग॰) तक, फिर भरणी 05:15 (12 अग॰) तक
योग
शूल 13:48 तक, फिर गण्ड 14:13 (11 अग॰) तक
करण
वणिज 10:22 तक, फिर विष्टि 23:08 तक, फिर बव 12:02 (11 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:39 – 14:16
  • यमगंड07:51 – 09:27
  • गुलिक काल11:03 – 12:39

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:14 – 07:51
  • अमृत(शुभ)07:51 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • शुभ(शुभ)11:03 – 12:39
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:52
  • चर(सामान्य)15:52 – 17:28
  • लाभ(शुभ)17:28 – 19:04

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:04 – 20:28
  • शुभ(शुभ)20:28 – 21:52
  • अमृत(शुभ)21:52 – 23:16
  • चर(सामान्य)23:16 – 00:40 (11 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (11 अग॰) – 02:03 (11 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (11 अग॰) – 03:27 (11 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (11 अग॰) – 04:51 (11 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:51 (11 अग॰) – 06:15 (11 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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