पंचांग 10 अक्टूबर 2039
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 अक्टूबर 2039 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय00:19 (11 अक्टू॰)
चंद्रास्त13:07
- मास:
- अधिक आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
- संवत्सर:
- सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन 05:28 (11 अक्टू॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 03:35 (11 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण नवमी 05:20 (12 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 09:25 तक, फिर पुनर्वसु 12:05 (11 अक्टू॰) तक
- योग
- परिघ 11:20 तक, फिर शिव 11:57 (11 अक्टू॰) तक
- करण
- बालव 14:29 तक, फिर कौलव 03:35 (11 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 16:32 (11 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:45
- राहु काल07:55 – 09:24
- यमगंड10:52 – 12:21
- गुलिक काल13:50 – 15:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:26 – 07:55
- काल(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
- शुभ(शुभ)09:24 – 10:52
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:21
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:50
- चर(सामान्य)13:50 – 15:18
- लाभ(शुभ)15:18 – 16:47
- अमृत(शुभ)16:47 – 18:16
रात
- चर(सामान्य)18:16 – 19:47
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:47 – 21:18
- काल(वर्जित (परंपरा))21:18 – 22:50
- लाभ(शुभ)22:50 – 00:21 (11 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:21 (11 अक्टू॰) – 01:53 (11 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)01:53 (11 अक्टू॰) – 03:24 (11 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)03:24 (11 अक्टू॰) – 04:55 (11 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)04:55 (11 अक्टू॰) – 06:27 (11 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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