पंचांग 29 दिसंबर 2039

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 दिसंबर 2039 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:05
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय17:12
चंद्रास्त06:50 (30 दिस॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
संवत्सर:
सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृषभ 13:10 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 15:25 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 18:07 (30 दिस॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 02:43 (30 दिस॰) तक, फिर आर्द्रा 05:47 (31 दिस॰) तक
योग
शुक्ल 02:15 (30 दिस॰) तक, फिर ब्रह्म 03:10 (31 दिस॰) तक
करण
वणिज 15:25 तक, फिर विष्टि 04:47 (30 दिस॰) तक, फिर बव 18:07 (30 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 12:58
  • राहु काल13:59 – 15:21
  • यमगंड07:05 – 08:28
  • गुलिक काल09:50 – 11:13

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)07:05 – 08:28
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:28 – 09:50
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:50 – 11:13
  • चर(सामान्य)11:13 – 12:36
  • लाभ(शुभ)12:36 – 13:59
  • अमृत(शुभ)13:59 – 15:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:21 – 16:44
  • शुभ(शुभ)16:44 – 18:07

रात

  • अमृत(शुभ)18:07 – 19:44
  • चर(सामान्य)19:44 – 21:21
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:21 – 22:59
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:59 – 00:36 (30 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)00:36 (30 दिस॰) – 02:13 (30 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:13 (30 दिस॰) – 03:51 (30 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)03:51 (30 दिस॰) – 05:28 (30 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)05:28 (30 दिस॰) – 07:05 (30 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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