पंचांग 13 मार्च 2040
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 मार्च 2040 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:44
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय07:01
चंद्रास्त19:08
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
- संवत्सर:
- सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- कुंभ 09:31 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 07:16 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 05:39 (14 मार्च) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 04:38 (15 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 15:16 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 14:33 (14 मार्च) तक
- योग
- शुभ 22:15 तक, फिर शुक्ल 20:05 (14 मार्च) तक
- करण
- नाग 07:16 तक, फिर किंस्तुघ्न 18:23 तक, फिर बव 05:39 (14 मार्च) तक, फिर बालव 17:04 (14 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:08
- राहु काल15:43 – 17:13
- यमगंड09:44 – 11:14
- गुलिक काल12:44 – 14:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:44 – 08:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:14 – 09:44
- चर(सामान्य)09:44 – 11:14
- लाभ(शुभ)11:14 – 12:44
- अमृत(शुभ)12:44 – 14:13
- काल(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
- शुभ(शुभ)15:43 – 17:13
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:13 – 18:43
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:43 – 20:13
- लाभ(शुभ)20:13 – 21:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:13
- शुभ(शुभ)23:13 – 00:43 (14 मार्च)
- अमृत(शुभ)00:43 (14 मार्च) – 02:13 (14 मार्च)
- चर(सामान्य)02:13 (14 मार्च) – 03:43 (14 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:43 (14 मार्च) – 05:13 (14 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:13 (14 मार्च) – 06:43 (14 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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