पंचांग 20 मार्च 2040
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 मार्च 2040 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:38
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय11:43
चंद्रास्त01:22 (21 मार्च)
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
- संवत्सर:
- सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- वृषभ 10:39 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल सप्तमी 10:12 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 12:47 (21 मार्च) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 00:11 (21 मार्च) तक, फिर आर्द्रा 03:15 (22 मार्च) तक
- योग
- आयुष्मान 18:31 तक, फिर सौभाग्य 19:30 (21 मार्च) तक
- करण
- वणिज 10:12 तक, फिर विष्टि 23:29 तक, फिर बव 12:47 (21 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:06
- राहु काल15:43 – 17:14
- यमगंड09:40 – 11:11
- गुलिक काल12:42 – 14:12
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:38 – 08:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:09 – 09:40
- चर(सामान्य)09:40 – 11:11
- लाभ(शुभ)11:11 – 12:42
- अमृत(शुभ)12:42 – 14:12
- काल(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
- शुभ(शुभ)15:43 – 17:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:45
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:45 – 20:14
- लाभ(शुभ)20:14 – 21:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:12
- शुभ(शुभ)23:12 – 00:41 (21 मार्च)
- अमृत(शुभ)00:41 (21 मार्च) – 02:10 (21 मार्च)
- चर(सामान्य)02:10 (21 मार्च) – 03:39 (21 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:39 (21 मार्च) – 05:08 (21 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:08 (21 मार्च) – 06:37 (21 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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