पंचांग 2 सितंबर 2040

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 सितंबर 2040 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय03:20 (3 सित॰)
चंद्रास्त16:09
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1962 · विक्रम (चैत्रादि) 2097
संवत्सर:
रौद्र (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मिथुन 16:42 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 12:40 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 15:07 (3 सित॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 23:28 तक, फिर पुष्य 02:22 (4 सित॰) तक
योग
व्यतीपात 17:38 तक, फिर वरीयान 18:33 (3 सित॰) तक
करण
बालव 12:40 तक, फिर कौलव 01:55 (3 सित॰) तक, फिर तैतिल 15:07 (3 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:58
  • राहु काल17:14 – 18:47
  • यमगंड12:33 – 14:07
  • गुलिक काल15:40 – 17:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:20 – 07:53
  • चर(सामान्य)07:53 – 09:27
  • लाभ(शुभ)09:27 – 11:00
  • अमृत(शुभ)11:00 – 12:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:07
  • शुभ(शुभ)14:07 – 15:40
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:40 – 17:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:47

रात

  • शुभ(शुभ)18:47 – 20:14
  • अमृत(शुभ)20:14 – 21:40
  • चर(सामान्य)21:40 – 23:07
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:07 – 00:34 (3 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:34 (3 सित॰) – 02:00 (3 सित॰)
  • लाभ(शुभ)02:00 (3 सित॰) – 03:27 (3 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (3 सित॰) – 04:53 (3 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:53 (3 सित॰) – 06:20 (3 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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