पंचांग 30 सितंबर 2040

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 सितंबर 2040 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय02:05 (1 अक्टू॰)
चंद्रास्त14:50
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1962 · विक्रम (चैत्रादि) 2097
संवत्सर:
रौद्र (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 04:18 (1 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण एकादशी 06:31 (2 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 06:50 तक, फिर पुष्य 09:46 (1 अक्टू॰) तक
योग
शिव 01:59 (1 अक्टू॰) तक, फिर सिद्ध 02:43 (2 अक्टू॰) तक
करण
वणिज 15:05 तक, फिर विष्टि 04:18 (1 अक्टू॰) तक, फिर बव 17:27 (1 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल16:53 – 18:23
  • यमगंड12:24 – 13:54
  • गुलिक काल15:23 – 16:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:24
  • लाभ(शुभ)09:24 – 10:54
  • अमृत(शुभ)10:54 – 12:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:54
  • शुभ(शुभ)13:54 – 15:23
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:23 – 16:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:53 – 18:23

रात

  • शुभ(शुभ)18:23 – 19:53
  • अमृत(शुभ)19:53 – 21:23
  • चर(सामान्य)21:23 – 22:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:54 – 00:24 (1 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:24 (1 अक्टू॰) – 01:54 (1 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:54 (1 अक्टू॰) – 03:24 (1 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (1 अक्टू॰) – 04:54 (1 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (1 अक्टू॰) – 06:25 (1 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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