पंचांग 16 जनवरी 2041
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 जनवरी 2041 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:18
चंद्रोदय17:32
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- पौष (अमांत)
- संवत:
- शक 1962 · विक्रम (चैत्रादि) 2097
- संवत्सर:
- रौद्र (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- मिथुन 06:25 (17 जन॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी 10:21 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 12:41 (17 जन॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 10:21 तक, फिर पुनर्वसु 13:07 (17 जन॰) तक
- योग
- वैधृति 01:09 (17 जन॰) तक, फिर विष्कम्भ 01:53 (18 जन॰) तक
- करण
- वणिज 10:21 तक, फिर विष्टि 23:29 तक, फिर बव 12:41 (17 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:44 – 14:08
- यमगंड08:33 – 09:57
- गुलिक काल11:20 – 12:44
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:09 – 08:33
- अमृत(शुभ)08:33 – 09:57
- काल(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:20
- शुभ(शुभ)11:20 – 12:44
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:44 – 14:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:31
- चर(सामान्य)15:31 – 16:55
- लाभ(शुभ)16:55 – 18:18
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:18 – 19:55
- शुभ(शुभ)19:55 – 21:31
- अमृत(शुभ)21:31 – 23:08
- चर(सामान्य)23:08 – 00:44 (17 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:44 (17 जन॰) – 02:20 (17 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:20 (17 जन॰) – 03:57 (17 जन॰)
- लाभ(शुभ)03:57 (17 जन॰) – 05:33 (17 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (17 जन॰) – 07:09 (17 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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