पंचांग 14 अगस्त 2041

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 अगस्त 2041 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:02
चंद्रोदय21:06
चंद्रास्त08:24
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
संवत्सर:
दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
कुंभ 14:17 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 20:19 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 17:12 (15 अग॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 19:38 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 17:19 (15 अग॰) तक
योग
सुकर्मा 23:04 तक, फिर धृति 19:29 (15 अग॰) तक
करण
वणिज 10:02 तक, फिर विष्टि 20:19 तक, फिर बव 06:41 (15 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:39 – 14:14
  • यमगंड07:51 – 09:27
  • गुलिक काल11:03 – 12:39

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:16 – 07:51
  • अमृत(शुभ)07:51 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • शुभ(शुभ)11:03 – 12:39
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:50
  • चर(सामान्य)15:50 – 17:26
  • लाभ(शुभ)17:26 – 19:02

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:02 – 20:26
  • शुभ(शुभ)20:26 – 21:50
  • अमृत(शुभ)21:50 – 23:14
  • चर(सामान्य)23:14 – 00:39 (15 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:39 (15 अग॰) – 02:03 (15 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (15 अग॰) – 03:27 (15 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (15 अग॰) – 04:52 (15 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:52 (15 अग॰) – 06:16 (15 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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