पंचांग 22 अक्टूबर 2041
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 अक्टूबर 2041 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय04:57 (23 अक्टू॰)
चंद्रास्त16:39
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
- संवत्सर:
- दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 03:14 (23 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 05:18 (24 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 00:23 (23 अक्टू॰) तक, फिर हस्त 02:58 (24 अक्टू॰) तक
- योग
- इन्द्र 02:53 (23 अक्टू॰) तक, फिर वैधृति 03:27 (24 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 14:05 तक, फिर वणिज 03:14 (23 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 16:19 (23 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
- राहु काल15:13 – 16:40
- यमगंड09:24 – 10:51
- गुलिक काल12:18 – 13:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:30 – 07:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:24
- चर(सामान्य)09:24 – 10:51
- लाभ(शुभ)10:51 – 12:18
- अमृत(शुभ)12:18 – 13:45
- काल(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:13
- शुभ(शुभ)15:13 – 16:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:40 – 18:07
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:07 – 19:40
- लाभ(शुभ)19:40 – 21:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:13 – 22:46
- शुभ(शुभ)22:46 – 00:19 (23 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:19 (23 अक्टू॰) – 01:52 (23 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:52 (23 अक्टू॰) – 03:24 (23 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (23 अक्टू॰) – 04:57 (23 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:57 (23 अक्टू॰) – 06:30 (23 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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