पंचांग 13 दिसंबर 2041
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 दिसंबर 2041 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:57
सूर्यास्त17:59
चंद्रोदय23:06
चंद्रास्त11:30
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
- संवत्सर:
- दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कर्क 07:34 तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 03:12 (14 दिस॰) तक, फिर कृष्ण सप्तमी 05:43 (15 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 07:34 तक, फिर मघा 10:17 (14 दिस॰) तक
- योग
- वैधृति 13:06 तक, फिर विष्कम्भ 13:47 (14 दिस॰) तक
- करण
- गर 14:04 तक, फिर वणिज 03:12 (14 दिस॰) तक, फिर विष्टि 16:25 (14 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:50
- राहु काल11:05 – 12:28
- यमगंड15:14 – 16:36
- गुलिक काल08:20 – 09:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:57 – 08:20
- लाभ(शुभ)08:20 – 09:43
- अमृत(शुभ)09:43 – 11:05
- काल(वर्जित (परंपरा))11:05 – 12:28
- शुभ(शुभ)12:28 – 13:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:51 – 15:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:14 – 16:36
- चर(सामान्य)16:36 – 17:59
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:59 – 19:37
- काल(वर्जित (परंपरा))19:37 – 21:14
- लाभ(शुभ)21:14 – 22:51
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:51 – 00:29 (14 दिस॰)
- शुभ(शुभ)00:29 (14 दिस॰) – 02:06 (14 दिस॰)
- अमृत(शुभ)02:06 (14 दिस॰) – 03:43 (14 दिस॰)
- चर(सामान्य)03:43 (14 दिस॰) – 05:20 (14 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:20 (14 दिस॰) – 06:58 (14 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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