पंचांग 2 मार्च 2042
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 मार्च 2042 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:52
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय14:56
चंद्रास्त04:38 (3 मार्च)
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
- संवत्सर:
- दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मिथुन 18:44 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 17:58 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 19:23 (3 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 01:11 (3 मार्च) तक, फिर पुष्य 03:14 (4 मार्च) तक
- योग
- सौभाग्य 04:56 (3 मार्च) तक, फिर शोभन 05:03 (4 मार्च) तक
- करण
- विष्टि 17:58 तक, फिर बव 06:37 (3 मार्च) तक, फिर बालव 19:23 (3 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10
- राहु काल17:12 – 18:40
- यमगंड12:46 – 14:15
- गुलिक काल15:43 – 17:12
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:52 – 08:21
- चर(सामान्य)08:21 – 09:49
- लाभ(शुभ)09:49 – 11:18
- अमृत(शुभ)11:18 – 12:46
- काल(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:15
- शुभ(शुभ)14:15 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:12
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:12 – 18:40
रात
- शुभ(शुभ)18:40 – 20:12
- अमृत(शुभ)20:12 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:46 (3 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:46 (3 मार्च) – 02:17 (3 मार्च)
- लाभ(शुभ)02:17 (3 मार्च) – 03:49 (3 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:49 (3 मार्च) – 05:20 (3 मार्च)
- शुभ(शुभ)05:20 (3 मार्च) – 06:52 (3 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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