पंचांग 24 सितंबर 2058

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

24 सितंबर 2058 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:29
चंद्रोदय11:57
चंद्रास्त23:13
मास:
अधिक आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1980 · विक्रम (चैत्रादि) 2115
संवत्सर:
बहुधान्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
वृश्चिक 01:54 (25 सित॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 04:30 (25 सित॰) तक, फिर शुक्ल अष्टमी 02:51 (26 सित॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 01:54 (25 सित॰) तक, फिर मूल 01:02 (26 सित॰) तक
योग
प्रीति 08:16 तक, फिर आयुष्मान 06:11 (25 सित॰) तक, फिर सौभाग्य 03:43 (26 सित॰) तक
करण
गर 17:08 तक, फिर वणिज 04:30 (25 सित॰) तक, फिर विष्टि 15:44 (25 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:50
  • राहु काल15:27 – 16:58
  • यमगंड09:25 – 10:55
  • गुलिक काल12:26 – 13:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
  • चर(सामान्य)09:25 – 10:55
  • लाभ(शुभ)10:55 – 12:26
  • अमृत(शुभ)12:26 – 13:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:57 – 15:27
  • शुभ(शुभ)15:27 – 16:58
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:58 – 18:29

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:29 – 19:58
  • लाभ(शुभ)19:58 – 21:27
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:27 – 22:57
  • शुभ(शुभ)22:57 – 00:26 (25 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:26 (25 सित॰) – 01:55 (25 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:55 (25 सित॰) – 03:25 (25 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (25 सित॰) – 04:54 (25 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (25 सित॰) – 06:24 (25 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5

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