पंचांग 17 नवंबर 2058
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 नवंबर 2058 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:42
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय07:41
चंद्रास्त19:02
- मास:
- कार्तिक (अमांत)
- संवत:
- शक 1980 · विक्रम (चैत्रादि) 2115
- संवत्सर:
- बहुधान्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 07:20 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 05:40 (18 नव॰) तक, फिर शुक्ल तृतीया 03:42 (19 नव॰) तक
- नक्षत्र
- अनुराधा 14:56 तक, फिर ज्येष्ठा 13:50 (18 नव॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 19:21 तक, फिर सुकर्मा 16:40 (18 नव॰) तक
- करण
- बव 07:20 तक, फिर बालव 18:32 तक, फिर कौलव 05:40 (18 नव॰) तक, फिर तैतिल 16:43 (18 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:41
- राहु काल16:32 – 17:56
- यमगंड12:19 – 13:43
- गुलिक काल15:08 – 16:32
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:42 – 08:06
- चर(सामान्य)08:06 – 09:30
- लाभ(शुभ)09:30 – 10:55
- अमृत(शुभ)10:55 – 12:19
- काल(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:43
- शुभ(शुभ)13:43 – 15:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:32
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:32 – 17:56
रात
- शुभ(शुभ)17:56 – 19:32
- अमृत(शुभ)19:32 – 21:08
- चर(सामान्य)21:08 – 22:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:19 (18 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:19 (18 नव॰) – 01:55 (18 नव॰)
- लाभ(शुभ)01:55 (18 नव॰) – 03:31 (18 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:31 (18 नव॰) – 05:06 (18 नव॰)
- शुभ(शुभ)05:06 (18 नव॰) – 06:42 (18 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5
अपनी कुंडली देखें