पंचांग 14 जनवरी 2059

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 जनवरी 2059 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदय07:18
चंद्रास्त18:34
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1981 · विक्रम (चैत्रादि) 2116
संवत्सर:
प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
धनु 10:34 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 09:26 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 05:53 (15 जन॰) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 02:15 (16 जन॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 02:28 (15 जन॰) तक, फिर श्रवण 23:34 (15 जन॰) तक
योग
हर्षण 21:30 तक, फिर वज्र 17:17 (15 जन॰) तक
करण
नाग 09:26 तक, फिर किंस्तुघ्न 19:41 तक, फिर बव 05:53 (15 जन॰) तक, फिर बालव 16:03 (15 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:05
  • राहु काल15:30 – 16:53
  • यमगंड09:56 – 11:20
  • गुलिक काल12:43 – 14:06

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:56
  • चर(सामान्य)09:56 – 11:20
  • लाभ(शुभ)11:20 – 12:43
  • अमृत(शुभ)12:43 – 14:06
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:06 – 15:30
  • शुभ(शुभ)15:30 – 16:53
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:53 – 18:17

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:17 – 19:53
  • लाभ(शुभ)19:53 – 21:30
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:30 – 23:07
  • शुभ(शुभ)23:07 – 00:43 (15 जन॰)
  • अमृत(शुभ)00:43 (15 जन॰) – 02:20 (15 जन॰)
  • चर(सामान्य)02:20 (15 जन॰) – 03:56 (15 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:56 (15 जन॰) – 05:33 (15 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:33 (15 जन॰) – 07:09 (15 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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