पंचांग 13 मार्च 2059
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 मार्च 2059 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:44
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:12
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1980 · विक्रम (चैत्रादि) 2115
- संवत्सर:
- बहुधान्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 09:23 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 05:35 (14 मार्च) तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 01:57 (15 मार्च) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 15:50 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 12:51 (14 मार्च) तक
- योग
- साध्य 23:28 तक, फिर शुभ 19:14 (14 मार्च) तक
- करण
- शकुनि 09:23 तक, फिर चतुष्पद 19:29 तक, फिर नाग 05:35 (14 मार्च) तक, फिर किंस्तुघ्न 15:44 (14 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:08
- राहु काल14:14 – 15:43
- यमगंड06:44 – 08:14
- गुलिक काल09:44 – 11:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:44 – 08:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:14 – 09:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:44 – 11:14
- चर(सामान्य)11:14 – 12:44
- लाभ(शुभ)12:44 – 14:14
- अमृत(शुभ)14:14 – 15:43
- काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:13
- शुभ(शुभ)17:13 – 18:43
रात
- अमृत(शुभ)18:43 – 20:13
- चर(सामान्य)20:13 – 21:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:13
- काल(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:43 (14 मार्च)
- लाभ(शुभ)00:43 (14 मार्च) – 02:13 (14 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:13 (14 मार्च) – 03:43 (14 मार्च)
- शुभ(शुभ)03:43 (14 मार्च) – 05:13 (14 मार्च)
- अमृत(शुभ)05:13 (14 मार्च) – 06:43 (14 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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