पंचांग 20 जनवरी 2060
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 जनवरी 2060 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय20:46
चंद्रास्त09:07
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1981 · विक्रम (चैत्रादि) 2116
- संवत्सर:
- प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 01:40 (21 जन॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 03:41 (22 जन॰) तक
- नक्षत्र
- मघा 04:38 (21 जन॰) तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 07:10 (22 जन॰) तक
- योग
- आयुष्मान 11:49 तक, फिर सौभाग्य 12:02 (21 जन॰) तक
- करण
- वणिज 12:50 तक, फिर विष्टि 01:40 (21 जन॰) तक, फिर बव 14:37 (21 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:07
- राहु काल15:33 – 16:57
- यमगंड09:57 – 11:21
- गुलिक काल12:45 – 14:09
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:57
- चर(सामान्य)09:57 – 11:21
- लाभ(शुभ)11:21 – 12:45
- अमृत(शुभ)12:45 – 14:09
- काल(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:33
- शुभ(शुभ)15:33 – 16:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:57 – 18:21
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:21 – 19:57
- लाभ(शुभ)19:57 – 21:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:33 – 23:09
- शुभ(शुभ)23:09 – 00:45 (21 जन॰)
- अमृत(शुभ)00:45 (21 जन॰) – 02:21 (21 जन॰)
- चर(सामान्य)02:21 (21 जन॰) – 03:57 (21 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:57 (21 जन॰) – 05:33 (21 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:33 (21 जन॰) – 07:09 (21 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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