पंचांग 18 मार्च 2060

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 मार्च 2060 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:39
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय19:48
चंद्रास्त07:21
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1981 · विक्रम (चैत्रादि) 2116
संवत्सर:
प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 11:41 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 14:19 (19 मार्च) तक
नक्षत्र
हस्त 03:10 (19 मार्च) तक, फिर चित्रा 06:18 (20 मार्च) तक
योग
वृद्धि 01:16 (19 मार्च) तक, फिर ध्रुव 02:17 (20 मार्च) तक
करण
कौलव 11:41 तक, फिर तैतिल 01:00 (19 मार्च) तक, फिर गर 14:19 (19 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:06
  • राहु काल14:13 – 15:43
  • यमगंड06:39 – 08:10
  • गुलिक काल09:41 – 11:11

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:39 – 08:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:10 – 09:41
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:41 – 11:11
  • चर(सामान्य)11:11 – 12:42
  • लाभ(शुभ)12:42 – 14:13
  • अमृत(शुभ)14:13 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • शुभ(शुभ)17:14 – 18:45

रात

  • अमृत(शुभ)18:45 – 20:14
  • चर(सामान्य)20:14 – 21:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:12
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:42 (19 मार्च)
  • लाभ(शुभ)00:42 (19 मार्च) – 02:11 (19 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:11 (19 मार्च) – 03:40 (19 मार्च)
  • शुभ(शुभ)03:40 (19 मार्च) – 05:09 (19 मार्च)
  • अमृत(शुभ)05:09 (19 मार्च) – 06:39 (19 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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