पंचांग 12 सितंबर 2060
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
12 सितंबर 2060 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय20:15
चंद्रास्त08:04
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1982 · विक्रम (चैत्रादि) 2117
- संवत्सर:
- विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मीन 01:47 (13 सित॰) तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 08:43 तक, फिर कृष्ण तृतीया 05:28 (13 सित॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 02:25 (14 सित॰) तक
- नक्षत्र
- रेवती 01:47 (13 सित॰) तक, फिर अश्विनी 23:28 (13 सित॰) तक
- योग
- गण्ड 06:23 तक, फिर वृद्धि 02:36 (13 सित॰) तक, फिर ध्रुव 22:57 (13 सित॰) तक
- करण
- गर 08:43 तक, फिर वणिज 19:05 तक, फिर विष्टि 05:28 (13 सित॰) तक, फिर बव 15:55 (13 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:55
- राहु काल17:06 – 18:39
- यमगंड12:30 – 14:02
- गुलिक काल15:34 – 17:06
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:54
- चर(सामान्य)07:54 – 09:26
- लाभ(शुभ)09:26 – 10:58
- अमृत(शुभ)10:58 – 12:30
- काल(वर्जित (परंपरा))12:30 – 14:02
- शुभ(शुभ)14:02 – 15:34
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:34 – 17:06
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:06 – 18:39
रात
- शुभ(शुभ)18:39 – 20:06
- अमृत(शुभ)20:06 – 21:34
- चर(सामान्य)21:34 – 23:02
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:02 – 00:30 (13 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:30 (13 सित॰) – 01:58 (13 सित॰)
- लाभ(शुभ)01:58 (13 सित॰) – 03:26 (13 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:26 (13 सित॰) – 04:54 (13 सित॰)
- शुभ(शुभ)04:54 (13 सित॰) – 06:22 (13 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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