पंचांग 17 दिसंबर 2060
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 दिसंबर 2060 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:00
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदय02:58 (18 दिस॰)
चंद्रास्त14:07
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1982 · विक्रम (चैत्रादि) 2117
- संवत्सर:
- विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कन्या 13:25 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 16:36 तक, फिर कृष्ण एकादशी 19:23 (18 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 03:00 (18 दिस॰) तक, फिर स्वाती 06:11 (19 दिस॰) तक
- योग
- शोभन 23:14 तक, फिर अतिगण्ड 00:16 (19 दिस॰) तक
- करण
- विष्टि 16:36 तक, फिर बव 05:59 (18 दिस॰) तक, फिर बालव 19:23 (18 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:52
- राहु काल11:08 – 12:30
- यमगंड15:16 – 16:38
- गुलिक काल08:22 – 09:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)07:00 – 08:22
- लाभ(शुभ)08:22 – 09:45
- अमृत(शुभ)09:45 – 11:08
- काल(वर्जित (परंपरा))11:08 – 12:30
- शुभ(शुभ)12:30 – 13:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:16
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:16 – 16:38
- चर(सामान्य)16:38 – 18:01
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:01 – 19:38
- काल(वर्जित (परंपरा))19:38 – 21:16
- लाभ(शुभ)21:16 – 22:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:53 – 00:31 (18 दिस॰)
- शुभ(शुभ)00:31 (18 दिस॰) – 02:08 (18 दिस॰)
- अमृत(शुभ)02:08 (18 दिस॰) – 03:45 (18 दिस॰)
- चर(सामान्य)03:45 (18 दिस॰) – 05:23 (18 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:23 (18 दिस॰) – 07:00 (18 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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