पंचांग 23 मार्च 2061
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
23 मार्च 2061 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:35
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय07:38
चंद्रास्त20:32
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1983 · विक्रम (चैत्रादि) 2118
- संवत्सर:
- वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मीन 12:48 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 17:08 तक, फिर शुक्ल तृतीया 14:07 (24 मार्च) तक
- नक्षत्र
- रेवती 12:49 तक, फिर अश्विनी 10:33 (24 मार्च) तक
- योग
- इन्द्र 01:20 (24 मार्च) तक, फिर वैधृति 21:43 (24 मार्च) तक
- करण
- बालव 06:38 तक, फिर कौलव 17:08 तक, फिर तैतिल 03:37 (24 मार्च) तक, फिर गर 14:07 (24 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:41 – 14:12
- यमगंड08:07 – 09:38
- गुलिक काल11:09 – 12:41
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:35 – 08:07
- अमृत(शुभ)08:07 – 09:38
- काल(वर्जित (परंपरा))09:38 – 11:09
- शुभ(शुभ)11:09 – 12:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:12
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:14
- लाभ(शुभ)17:14 – 18:46
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:46 – 20:14
- शुभ(शुभ)20:14 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:12
- चर(सामान्य)23:12 – 00:40 (24 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (24 मार्च) – 02:09 (24 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:09 (24 मार्च) – 03:37 (24 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:37 (24 मार्च) – 05:06 (24 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:06 (24 मार्च) – 06:35 (24 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
अपनी कुंडली देखें