पंचांग 12 जुलाई 2061

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 जुलाई 2061 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:05
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय01:58 (13 जुल॰)
चंद्रास्त14:28
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1983 · विक्रम (चैत्रादि) 2118
संवत्सर:
वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मेष 04:55 (13 जुल॰) तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण दशमी 22:35 तक, फिर कृष्ण एकादशी 19:43 (13 जुल॰) तक
नक्षत्र
भरणी 23:25 तक, फिर कृत्तिका 21:20 (13 जुल॰) तक
योग
धृति 13:44 तक, फिर शूल 10:28 (13 जुल॰) तक
करण
वणिज 11:52 तक, फिर विष्टि 22:35 तक, फिर बव 09:11 (13 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
  • राहु काल15:57 – 17:36
  • यमगंड09:22 – 11:01
  • गुलिक काल12:40 – 14:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:05 – 07:44
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:44 – 09:22
  • चर(सामान्य)09:22 – 11:01
  • लाभ(शुभ)11:01 – 12:40
  • अमृत(शुभ)12:40 – 14:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
  • शुभ(शुभ)15:57 – 17:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:15

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
  • लाभ(शुभ)20:36 – 21:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
  • शुभ(शुभ)23:19 – 00:40 (13 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)00:40 (13 जुल॰) – 02:01 (13 जुल॰)
  • चर(सामान्य)02:01 (13 जुल॰) – 03:23 (13 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:23 (13 जुल॰) – 04:44 (13 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:44 (13 जुल॰) – 06:05 (13 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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