पंचांग 6 अक्टूबर 2061
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 अक्टूबर 2061 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:18
चंद्रोदय00:35 (7 अक्टू॰)
चंद्रास्त13:25
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1983 · विक्रम (चैत्रादि) 2118
- संवत्सर:
- वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन 03:50 (7 अक्टू॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 19:28 तक, फिर कृष्ण नवमी 17:46 (7 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 10:42 तक, फिर पुनर्वसु 09:36 (7 अक्टू॰) तक
- योग
- परिघ 18:00 तक, फिर शिव 15:28 (7 अक्टू॰) तक
- करण
- बालव 08:27 तक, फिर कौलव 19:28 तक, फिर तैतिल 06:34 (7 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:46
- राहु काल13:51 – 15:20
- यमगंड06:26 – 07:55
- गुलिक काल09:24 – 10:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:26 – 07:55
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
- चर(सामान्य)10:53 – 12:22
- लाभ(शुभ)12:22 – 13:51
- अमृत(शुभ)13:51 – 15:20
- काल(वर्जित (परंपरा))15:20 – 16:49
- शुभ(शुभ)16:49 – 18:18
रात
- अमृत(शुभ)18:18 – 19:49
- चर(सामान्य)19:49 – 21:20
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:20 – 22:51
- काल(वर्जित (परंपरा))22:51 – 00:22 (7 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)00:22 (7 अक्टू॰) – 01:53 (7 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:53 (7 अक्टू॰) – 03:24 (7 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)03:24 (7 अक्टू॰) – 04:55 (7 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)04:55 (7 अक्टू॰) – 06:26 (7 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
अपनी कुंडली देखें