पंचांग 14 दिसंबर 2061

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 दिसंबर 2061 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:58
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय08:56
चंद्रास्त19:59
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1983 · विक्रम (चैत्रादि) 2118
संवत्सर:
वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
धनु 01:18 (15 दिस॰) तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 09:04 तक, फिर शुक्ल तृतीया 11:26 (15 दिस॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 18:37 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 21:20 (15 दिस॰) तक
योग
वृद्धि 21:41 तक, फिर ध्रुव 22:19 (15 दिस॰) तक
करण
कौलव 09:04 तक, फिर तैतिल 22:17 तक, फिर गर 11:26 (15 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:51परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:29 – 13:51
  • यमगंड08:21 – 09:43
  • गुलिक काल11:06 – 12:29

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:58 – 08:21
  • अमृत(शुभ)08:21 – 09:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:43 – 11:06
  • शुभ(शुभ)11:06 – 12:29
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:29 – 13:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:51 – 15:14
  • चर(सामान्य)15:14 – 16:37
  • लाभ(शुभ)16:37 – 18:00

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:00 – 19:37
  • शुभ(शुभ)19:37 – 21:14
  • अमृत(शुभ)21:14 – 22:52
  • चर(सामान्य)22:52 – 00:29 (15 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:29 (15 दिस॰) – 02:06 (15 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:06 (15 दिस॰) – 03:44 (15 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)03:44 (15 दिस॰) – 05:21 (15 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:21 (15 दिस॰) – 06:58 (15 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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