पंचांग 1 जनवरी 2062
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 जनवरी 2062 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:09
चंद्रोदय23:58
चंद्रास्त11:38
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1984 · विक्रम (चैत्रादि) 2119
- संवत्सर:
- चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- सिंह 09:55 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 06:33 (2 जन॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 07:20 (3 जन॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 04:21 (2 जन॰) तक, फिर हस्त 05:37 (3 जन॰) तक
- योग
- सौभाग्य 21:54 तक, फिर शोभन 21:06 (2 जन॰) तक
- करण
- विष्टि 18:27 तक, फिर बव 06:33 (2 जन॰) तक, फिर बालव 18:50 (2 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:00
- राहु काल16:46 – 18:09
- यमगंड12:38 – 14:00
- गुलिक काल15:23 – 16:46
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:29
- चर(सामान्य)08:29 – 09:52
- लाभ(शुभ)09:52 – 11:15
- अमृत(शुभ)11:15 – 12:38
- काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:00
- शुभ(शुभ)14:00 – 15:23
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:23 – 16:46
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:46 – 18:09
रात
- शुभ(शुभ)18:09 – 19:46
- अमृत(शुभ)19:46 – 21:23
- चर(सामान्य)21:23 – 23:01
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:01 – 00:38 (2 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:38 (2 जन॰) – 02:15 (2 जन॰)
- लाभ(शुभ)02:15 (2 जन॰) – 03:52 (2 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:52 (2 जन॰) – 05:29 (2 जन॰)
- शुभ(शुभ)05:29 (2 जन॰) – 07:07 (2 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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