पंचांग 26 मार्च 2062
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 मार्च 2062 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय19:58
चंद्रास्त07:08
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1983 · विक्रम (चैत्रादि) 2118
- संवत्सर:
- वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- कन्या 21:15 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 08:27 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 08:23 (27 मार्च) तक
- नक्षत्र
- हस्त 09:02 तक, फिर चित्रा 09:37 (27 मार्च) तक
- योग
- ध्रुव 18:37 तक, फिर व्याघात 17:39 (27 मार्च) तक
- करण
- कौलव 08:27 तक, फिर तैतिल 20:20 तक, फिर गर 08:23 (27 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
- राहु काल17:15 – 18:46
- यमगंड12:40 – 14:11
- गुलिक काल15:43 – 17:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:33 – 08:05
- चर(सामान्य)08:05 – 09:37
- लाभ(शुभ)09:37 – 11:08
- अमृत(शुभ)11:08 – 12:40
- काल(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:11
- शुभ(शुभ)14:11 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:46
रात
- शुभ(शुभ)18:46 – 20:15
- अमृत(शुभ)20:15 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:11
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:39 (27 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:39 (27 मार्च) – 02:08 (27 मार्च)
- लाभ(शुभ)02:08 (27 मार्च) – 03:36 (27 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:36 (27 मार्च) – 05:04 (27 मार्च)
- शुभ(शुभ)05:04 (27 मार्च) – 06:32 (27 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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