पंचांग 14 नवंबर 2062
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 नवंबर 2062 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:40
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय15:59
चंद्रास्त04:56 (15 नव॰)
- मास:
- कार्तिक (अमांत)
- संवत:
- शक 1984 · विक्रम (चैत्रादि) 2119
- संवत्सर:
- चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- मीन 22:14 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 05:39 (15 नव॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 04:16 (16 नव॰) तक
- नक्षत्र
- रेवती 22:14 तक, फिर अश्विनी 21:43 (15 नव॰) तक
- योग
- वज्र 09:04 तक, फिर सिद्धि 07:18 (15 नव॰) तक
- करण
- कौलव 18:05 तक, फिर तैतिल 05:39 (15 नव॰) तक, फिर गर 17:02 (15 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:41
- राहु काल15:08 – 16:32
- यमगंड09:29 – 10:54
- गुलिक काल12:18 – 13:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:40 – 08:05
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:05 – 09:29
- चर(सामान्य)09:29 – 10:54
- लाभ(शुभ)10:54 – 12:18
- अमृत(शुभ)12:18 – 13:43
- काल(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
- शुभ(शुभ)15:08 – 16:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:32 – 17:57
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:32
- लाभ(शुभ)19:32 – 21:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:08 – 22:43
- शुभ(शुभ)22:43 – 00:19 (15 नव॰)
- अमृत(शुभ)00:19 (15 नव॰) – 01:54 (15 नव॰)
- चर(सामान्य)01:54 (15 नव॰) – 03:30 (15 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:30 (15 नव॰) – 05:05 (15 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:05 (15 नव॰) – 06:41 (15 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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