पंचांग 28 अक्टूबर 2063

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

28 अक्टूबर 2063 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:32
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय12:37
चंद्रास्त23:52
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1985 · विक्रम (चैत्रादि) 2120
संवत्सर:
सुभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
धनु 10:01 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 18:43 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 20:51 (29 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 05:48 (29 अक्टू॰) तक, फिर श्रवण 08:37 (30 अक्टू॰) तक
योग
धृति 22:05 तक, फिर शूल 22:42 (29 अक्टू॰) तक
करण
वणिज 18:43 तक, फिर विष्टि 07:43 (29 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल16:37 – 18:03
  • यमगंड12:18 – 13:44
  • गुलिक काल15:11 – 16:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:32 – 07:58
  • चर(सामान्य)07:58 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:51
  • अमृत(शुभ)10:51 – 12:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
  • शुभ(शुभ)13:44 – 15:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:11 – 16:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:37 – 18:03

रात

  • शुभ(शुभ)18:03 – 19:37
  • अमृत(शुभ)19:37 – 21:11
  • चर(सामान्य)21:11 – 22:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:44 – 00:18 (29 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:18 (29 अक्टू॰) – 01:52 (29 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:52 (29 अक्टू॰) – 03:25 (29 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (29 अक्टू॰) – 04:59 (29 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:59 (29 अक्टू॰) – 06:32 (29 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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