पंचांग 12 सितंबर 2064

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 सितंबर 2064 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय07:23
चंद्रास्त19:29
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1986 · विक्रम (चैत्रादि) 2121
संवत्सर:
तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 00:21 (13 सित॰) तक, फिर शुक्ल तृतीया 20:47 (13 सित॰) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 08:26 तक, फिर हस्त 05:34 (13 सित॰) तक, फिर चित्रा 02:52 (14 सित॰) तक
योग
शुभ 10:19 तक, फिर शुक्ल 06:11 (13 सित॰) तक, फिर ब्रह्म 02:11 (14 सित॰) तक
करण
बालव 14:11 तक, फिर कौलव 00:21 (13 सित॰) तक, फिर तैतिल 10:32 (13 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:55
  • राहु काल10:58 – 12:30
  • यमगंड15:34 – 17:06
  • गुलिक काल07:54 – 09:26

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:21 – 07:54
  • लाभ(शुभ)07:54 – 09:26
  • अमृत(शुभ)09:26 – 10:58
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:30
  • शुभ(शुभ)12:30 – 14:02
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:02 – 15:34
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:34 – 17:06
  • चर(सामान्य)17:06 – 18:39

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:39 – 20:06
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:06 – 21:34
  • लाभ(शुभ)21:34 – 23:02
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:02 – 00:30 (13 सित॰)
  • शुभ(शुभ)00:30 (13 सित॰) – 01:58 (13 सित॰)
  • अमृत(शुभ)01:58 (13 सित॰) – 03:26 (13 सित॰)
  • चर(सामान्य)03:26 (13 सित॰) – 04:54 (13 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (13 सित॰) – 06:22 (13 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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