पंचांग 10 अक्टूबर 2064
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 अक्टूबर 2064 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:01
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1986 · विक्रम (चैत्रादि) 2121
- संवत्सर:
- तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कन्या 02:45 (11 अक्टू॰) तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 16:03 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 12:08 (11 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 16:19 तक, फिर चित्रा 13:12 (11 अक्टू॰) तक
- योग
- इन्द्र 16:34 तक, फिर वैधृति 12:11 (11 अक्टू॰) तक
- करण
- नाग 16:03 तक, फिर किंस्तुघ्न 02:05 (11 अक्टू॰) तक, फिर बव 12:08 (11 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
- राहु काल10:52 – 12:21
- यमगंड15:18 – 16:46
- गुलिक काल07:55 – 09:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:27 – 07:55
- लाभ(शुभ)07:55 – 09:24
- अमृत(शुभ)09:24 – 10:52
- काल(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:21
- शुभ(शुभ)12:21 – 13:49
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:49 – 15:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:18 – 16:46
- चर(सामान्य)16:46 – 18:15
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:15 – 19:46
- काल(वर्जित (परंपरा))19:46 – 21:18
- लाभ(शुभ)21:18 – 22:49
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:49 – 00:21 (11 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:21 (11 अक्टू॰) – 01:52 (11 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:52 (11 अक्टू॰) – 03:24 (11 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:24 (11 अक्टू॰) – 04:55 (11 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:55 (11 अक्टू॰) – 06:27 (11 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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