पंचांग 1 मार्च 2065
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 मार्च 2065 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:53
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय03:17 (2 मार्च)
चंद्रास्त13:29
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1986 · विक्रम (चैत्रादि) 2121
- संवत्सर:
- तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 05:53 (2 मार्च) तक, फिर कृष्ण एकादशी 05:26 (3 मार्च) तक
- नक्षत्र
- मूल 22:57 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 23:00 (2 मार्च) तक
- योग
- सिद्धि 04:06 (2 मार्च) तक, फिर व्यतीपात 02:32 (3 मार्च) तक
- करण
- वणिज 18:17 तक, फिर विष्टि 05:53 (2 मार्च) तक, फिर बव 17:36 (2 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10
- राहु काल17:12 – 18:40
- यमगंड12:46 – 14:15
- गुलिक काल15:43 – 17:12
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:53 – 08:21
- चर(सामान्य)08:21 – 09:50
- लाभ(शुभ)09:50 – 11:18
- अमृत(शुभ)11:18 – 12:46
- काल(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:15
- शुभ(शुभ)14:15 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:12
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:12 – 18:40
रात
- शुभ(शुभ)18:40 – 20:11
- अमृत(शुभ)20:11 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:46 (2 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:46 (2 मार्च) – 02:18 (2 मार्च)
- लाभ(शुभ)02:18 (2 मार्च) – 03:49 (2 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:49 (2 मार्च) – 05:21 (2 मार्च)
- शुभ(शुभ)05:21 (2 मार्च) – 06:52 (2 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
अपनी कुंडली देखें