पंचांग 10 अक्टूबर 2065

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अक्टूबर 2065 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय15:42
चंद्रास्त03:46 (11 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1987 · विक्रम (चैत्रादि) 2122
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 08:52 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 09:14 (11 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 12:41 तक, फिर शतभिषा 13:44 (11 अक्टू॰) तक
योग
शूल 13:39 तक, फिर गण्ड 12:54 (11 अक्टू॰) तक
करण
विष्टि 08:52 तक, फिर बव 21:00 तक, फिर बालव 09:14 (11 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
  • राहु काल09:24 – 10:52
  • यमगंड13:49 – 15:18
  • गुलिक काल06:27 – 07:55

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:55
  • शुभ(शुभ)07:55 – 09:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:21
  • चर(सामान्य)12:21 – 13:49
  • लाभ(शुभ)13:49 – 15:18
  • अमृत(शुभ)15:18 – 16:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:46 – 18:15

रात

  • लाभ(शुभ)18:15 – 19:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:47 – 21:18
  • शुभ(शुभ)21:18 – 22:49
  • अमृत(शुभ)22:49 – 00:21 (11 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)00:21 (11 अक्टू॰) – 01:52 (11 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:52 (11 अक्टू॰) – 03:24 (11 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (11 अक्टू॰) – 04:55 (11 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)04:55 (11 अक्टू॰) – 06:27 (11 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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