पंचांग 26 नवंबर 2065
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 नवंबर 2065 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:47
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय05:57 (27 नव॰)
चंद्रास्त16:21
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1987 · विक्रम (चैत्रादि) 2122
- संवत्सर:
- पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 10:43 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 07:00 (27 नव॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 17:30 तक, फिर विशाखा 14:29 (27 नव॰) तक
- योग
- सौभाग्य 07:35 तक, फिर शोभन 03:21 (27 नव॰) तक, फिर अतिगण्ड 22:58 (27 नव॰) तक
- करण
- वणिज 10:43 तक, फिर विष्टि 20:53 तक, फिर शकुनि 07:00 (27 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:44
- राहु काल13:45 – 15:08
- यमगंड06:47 – 08:11
- गुलिक काल09:34 – 10:58
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:47 – 08:11
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:11 – 09:34
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:34 – 10:58
- चर(सामान्य)10:58 – 12:21
- लाभ(शुभ)12:21 – 13:45
- अमृत(शुभ)13:45 – 15:08
- काल(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:32
- शुभ(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- अमृत(शुभ)17:56 – 19:32
- चर(सामान्य)19:32 – 21:09
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:09 – 22:45
- काल(वर्जित (परंपरा))22:45 – 00:22 (27 नव॰)
- लाभ(शुभ)00:22 (27 नव॰) – 01:58 (27 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:58 (27 नव॰) – 03:35 (27 नव॰)
- शुभ(शुभ)03:35 (27 नव॰) – 05:11 (27 नव॰)
- अमृत(शुभ)05:11 (27 नव॰) – 06:48 (27 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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