पंचांग 7 मार्च 2066
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
7 मार्च 2066 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:49
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय14:41
चंद्रास्त04:02 (8 मार्च)
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1987 · विक्रम (चैत्रादि) 2122
- संवत्सर:
- पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मिथुन 18:38 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 04:11 (8 मार्च) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 05:15 (9 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 01:09 (8 मार्च) तक, फिर पुष्य 02:51 (9 मार्च) तक
- योग
- सौभाग्य 20:09 तक, फिर शोभन 20:04 (8 मार्च) तक
- करण
- वणिज 15:24 तक, फिर विष्टि 04:11 (8 मार्च) तक, फिर बव 16:48 (8 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:09
- राहु काल17:13 – 18:42
- यमगंड12:45 – 14:14
- गुलिक काल15:43 – 17:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:49 – 08:18
- चर(सामान्य)08:18 – 09:47
- लाभ(शुभ)09:47 – 11:16
- अमृत(शुभ)11:16 – 12:45
- काल(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:14
- शुभ(शुभ)14:14 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:13 – 18:42
रात
- शुभ(शुभ)18:42 – 20:12
- अमृत(शुभ)20:12 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:45 (8 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:45 (8 मार्च) – 02:15 (8 मार्च)
- लाभ(शुभ)02:15 (8 मार्च) – 03:46 (8 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:46 (8 मार्च) – 05:17 (8 मार्च)
- शुभ(शुभ)05:17 (8 मार्च) – 06:48 (8 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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