पंचांग 4 जून 2066

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 जून 2066 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:08
चंद्रोदय15:18
चंद्रास्त03:01 (5 जून)
मास:
ज्येष्ठ (अमांत)
संवत:
शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
संवत्सर:
व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
कन्या 18:29 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 21:08 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 18:29 (5 जून) तक
नक्षत्र
हस्त 07:08 तक, फिर चित्रा 05:39 (5 जून) तक, फिर स्वाती 03:35 (6 जून) तक
योग
व्यतीपात 14:02 तक, फिर वरीयान 10:59 (5 जून) तक
करण
वणिज 10:13 तक, फिर विष्टि 21:08 तक, फिर बव 07:53 (5 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:59
  • राहु काल10:54 – 12:33
  • यमगंड15:50 – 17:29
  • गुलिक काल07:36 – 09:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)05:57 – 07:36
  • लाभ(शुभ)07:36 – 09:15
  • अमृत(शुभ)09:15 – 10:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:33
  • शुभ(शुभ)12:33 – 14:12
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:50
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:50 – 17:29
  • चर(सामान्य)17:29 – 19:08

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:08 – 20:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:29 – 21:50
  • लाभ(शुभ)21:50 – 23:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:33 (5 जून)
  • शुभ(शुभ)00:33 (5 जून) – 01:54 (5 जून)
  • अमृत(शुभ)01:54 (5 जून) – 03:15 (5 जून)
  • चर(सामान्य)03:15 (5 जून) – 04:36 (5 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:36 (5 जून) – 05:57 (5 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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