पंचांग 12 जुलाई 2066

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 जुलाई 2066 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:05
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय23:03
चंद्रास्त10:51
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
संवत्सर:
व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कुंभ 09:46 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 00:04 (13 जुल॰) तक, फिर कृष्ण सप्तमी 23:54 (13 जुल॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाभाद्रपदा 15:43 तक, फिर उत्तराभाद्रपदा 16:01 (13 जुल॰) तक
योग
सौभाग्य 06:21 तक, फिर शोभन 04:43 (13 जुल॰) तक, फिर अतिगण्ड 03:43 (14 जुल॰) तक
करण
गर 12:27 तक, फिर वणिज 00:04 (13 जुल॰) तक, फिर विष्टि 11:53 (13 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
  • राहु काल07:44 – 09:22
  • यमगंड11:01 – 12:40
  • गुलिक काल14:18 – 15:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:05 – 07:44
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:44 – 09:22
  • शुभ(शुभ)09:22 – 11:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:40
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
  • चर(सामान्य)14:18 – 15:57
  • लाभ(शुभ)15:57 – 17:36
  • अमृत(शुभ)17:36 – 19:15

रात

  • चर(सामान्य)19:15 – 20:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:36 – 21:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
  • लाभ(शुभ)23:19 – 00:40 (13 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:40 (13 जुल॰) – 02:01 (13 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)02:01 (13 जुल॰) – 03:23 (13 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)03:23 (13 जुल॰) – 04:44 (13 जुल॰)
  • चर(सामान्य)04:44 (13 जुल॰) – 06:05 (13 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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