पंचांग 3 अगस्त 2066

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 अगस्त 2066 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:13
सूर्यास्त19:08
चंद्रोदय17:03
चंद्रास्त04:27 (4 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
संवत्सर:
व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 08:26 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 05:08 (4 अग॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 01:46 (5 अग॰) तक
नक्षत्र
मूल 13:16 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 10:45 (4 अग॰) तक
योग
वैधृति 13:27 तक, फिर विष्कम्भ 09:38 (4 अग॰) तक
करण
बालव 08:26 तक, फिर कौलव 18:48 तक, फिर तैतिल 05:08 (4 अग॰) तक, फिर गर 15:27 (4 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल15:54 – 17:31
  • यमगंड09:26 – 11:03
  • गुलिक काल12:40 – 14:17

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:13 – 07:49
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:49 – 09:26
  • चर(सामान्य)09:26 – 11:03
  • लाभ(शुभ)11:03 – 12:40
  • अमृत(शुभ)12:40 – 14:17
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:54
  • शुभ(शुभ)15:54 – 17:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:31 – 19:08

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:08 – 20:31
  • लाभ(शुभ)20:31 – 21:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:54 – 23:17
  • शुभ(शुभ)23:17 – 00:40 (4 अग॰)
  • अमृत(शुभ)00:40 (4 अग॰) – 02:04 (4 अग॰)
  • चर(सामान्य)02:04 (4 अग॰) – 03:27 (4 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (4 अग॰) – 04:50 (4 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:50 (4 अग॰) – 06:13 (4 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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