पंचांग 18 अगस्त 2066

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 अगस्त 2066 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:59
चंद्रोदय04:39 (19 अग॰)
चंद्रास्त17:07
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
संवत्सर:
व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मिथुन 12:22 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 03:21 (19 अग॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 05:05 (20 अग॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 19:03 तक, फिर पुष्य 21:30 (19 अग॰) तक
योग
सिद्धि 16:54 तक, फिर व्यतीपात 17:27 (19 अग॰) तक
करण
गर 14:19 तक, फिर वणिज 03:21 (19 अग॰) तक, फिर विष्टि 16:16 (19 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:38 – 14:13
  • यमगंड07:52 – 09:27
  • गुलिक काल11:03 – 12:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:17 – 07:52
  • अमृत(शुभ)07:52 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • शुभ(शुभ)11:03 – 12:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:13
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:48
  • चर(सामान्य)15:48 – 17:24
  • लाभ(शुभ)17:24 – 18:59

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:59 – 20:24
  • शुभ(शुभ)20:24 – 21:48
  • अमृत(शुभ)21:48 – 23:13
  • चर(सामान्य)23:13 – 00:38 (19 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (19 अग॰) – 02:03 (19 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (19 अग॰) – 03:27 (19 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (19 अग॰) – 04:52 (19 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:52 (19 अग॰) – 06:17 (19 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें