पंचांग 18 सितंबर 2066

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 सितंबर 2066 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदय05:57 (19 सित॰)
चंद्रास्त17:36
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
संवत्सर:
व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 19:26 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 19:17 (19 सित॰) तक
नक्षत्र
मघा 08:29 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 09:14 (19 सित॰) तक
योग
साध्य 00:31 (19 सित॰) तक, फिर शुभ 23:14 (19 सित॰) तक
करण
विष्टि 07:18 तक, फिर शकुनि 19:26 तक, फिर चतुष्पद 07:26 (19 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:52
  • राहु काल09:25 – 10:57
  • यमगंड13:59 – 15:31
  • गुलिक काल06:22 – 07:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
  • शुभ(शुभ)07:54 – 09:25
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:28
  • चर(सामान्य)12:28 – 13:59
  • लाभ(शुभ)13:59 – 15:31
  • अमृत(शुभ)15:31 – 17:02
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:02 – 18:34

रात

  • लाभ(शुभ)18:34 – 20:02
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:02 – 21:31
  • शुभ(शुभ)21:31 – 23:00
  • अमृत(शुभ)23:00 – 00:28 (19 सित॰)
  • चर(सामान्य)00:28 (19 सित॰) – 01:57 (19 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:57 (19 सित॰) – 03:25 (19 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:25 (19 सित॰) – 04:54 (19 सित॰)
  • लाभ(शुभ)04:54 (19 सित॰) – 06:23 (19 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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