पंचांग 11 सितंबर 2067
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
11 सितंबर 2067 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय08:15
चंद्रास्त20:06
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- कन्या 03:12 (12 सित॰) तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 04:07 (12 सित॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 04:54 (13 सित॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 14:21 तक, फिर चित्रा 15:57 (12 सित॰) तक
- योग
- शुक्ल 19:16 तक, फिर ब्रह्म 18:58 (12 सित॰) तक
- करण
- तैतिल 15:35 तक, फिर गर 04:07 (12 सित॰) तक, फिर वणिज 16:33 (12 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:55
- राहु काल17:08 – 18:40
- यमगंड12:31 – 14:03
- गुलिक काल15:35 – 17:08
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:54
- चर(सामान्य)07:54 – 09:26
- लाभ(शुभ)09:26 – 10:58
- अमृत(शुभ)10:58 – 12:31
- काल(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:03
- शुभ(शुभ)14:03 – 15:35
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:35 – 17:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:08 – 18:40
रात
- शुभ(शुभ)18:40 – 20:08
- अमृत(शुभ)20:08 – 21:35
- चर(सामान्य)21:35 – 23:03
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:03 – 00:31 (12 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:31 (12 सित॰) – 01:58 (12 सित॰)
- लाभ(शुभ)01:58 (12 सित॰) – 03:26 (12 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:26 (12 सित॰) – 04:54 (12 सित॰)
- शुभ(शुभ)04:54 (12 सित॰) – 06:21 (12 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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