पंचांग 16 सितंबर 2067

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 सितंबर 2067 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:36
चंद्रोदय12:51
चंद्रास्त00:12 (17 सित॰)
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृश्चिक 17:51 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 03:07 (17 सित॰) तक, फिर शुक्ल नवमी 01:15 (18 सित॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 17:51 तक, फिर मूल 16:57 (17 सित॰) तक
योग
प्रीति 14:08 तक, फिर आयुष्मान 11:49 (17 सित॰) तक
करण
विष्टि 15:49 तक, फिर बव 03:07 (17 सित॰) तक, फिर बालव 14:15 (17 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
  • राहु काल10:57 – 12:29
  • यमगंड15:32 – 17:04
  • गुलिक काल07:54 – 09:25

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:22 – 07:54
  • लाभ(शुभ)07:54 – 09:25
  • अमृत(शुभ)09:25 – 10:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:29
  • शुभ(शुभ)12:29 – 14:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:01 – 15:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:32 – 17:04
  • चर(सामान्य)17:04 – 18:36

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:36 – 20:04
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:04 – 21:32
  • लाभ(शुभ)21:32 – 23:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:01 – 00:29 (17 सित॰)
  • शुभ(शुभ)00:29 (17 सित॰) – 01:57 (17 सित॰)
  • अमृत(शुभ)01:57 (17 सित॰) – 03:26 (17 सित॰)
  • चर(सामान्य)03:26 (17 सित॰) – 04:54 (17 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (17 सित॰) – 06:22 (17 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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