पंचांग 23 सितंबर 2067

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 सितंबर 2067 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:30
चंद्रोदय18:36
चंद्रास्त06:24
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 06:24 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 03:18 (24 सित॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 00:39 (25 सित॰) तक
नक्षत्र
उत्तराभाद्रपदा 00:52 (24 सित॰) तक, फिर रेवती 22:57 (24 सित॰) तक
योग
गण्ड 10:33 तक, फिर वृद्धि 06:56 (24 सित॰) तक
करण
बव 06:24 तक, फिर बालव 16:48 तक, फिर कौलव 03:18 (24 सित॰) तक, फिर तैतिल 13:54 (24 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:51
  • राहु काल10:56 – 12:26
  • यमगंड15:28 – 16:59
  • गुलिक काल07:54 – 09:25

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:23 – 07:54
  • लाभ(शुभ)07:54 – 09:25
  • अमृत(शुभ)09:25 – 10:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:56 – 12:26
  • शुभ(शुभ)12:26 – 13:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:57 – 15:28
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:28 – 16:59
  • चर(सामान्य)16:59 – 18:30

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:30 – 19:59
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:59 – 21:28
  • लाभ(शुभ)21:28 – 22:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:57 – 00:26 (24 सित॰)
  • शुभ(शुभ)00:26 (24 सित॰) – 01:56 (24 सित॰)
  • अमृत(शुभ)01:56 (24 सित॰) – 03:25 (24 सित॰)
  • चर(सामान्य)03:25 (24 सित॰) – 04:54 (24 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (24 सित॰) – 06:23 (24 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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