पंचांग 15 नवंबर 2067
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 नवंबर 2067 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:40
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय13:39
चंद्रास्त01:59 (16 नव॰)
- मास:
- कार्तिक (अमांत)
- संवत:
- शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल नवमी 15:20 तक, फिर शुक्ल दशमी 13:10 (16 नव॰) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 21:36 तक, फिर पूर्वाभाद्रपदा 20:10 (16 नव॰) तक
- योग
- ध्रुव 08:07 तक, फिर व्याघात 05:09 (16 नव॰) तक, फिर हर्षण 02:14 (17 नव॰) तक
- करण
- कौलव 15:20 तक, फिर तैतिल 02:14 (16 नव॰) तक, फिर गर 13:10 (16 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:41
- राहु काल15:07 – 16:32
- यमगंड09:29 – 10:54
- गुलिक काल12:18 – 13:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:40 – 08:05
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:05 – 09:29
- चर(सामान्य)09:29 – 10:54
- लाभ(शुभ)10:54 – 12:18
- अमृत(शुभ)12:18 – 13:43
- काल(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:07
- शुभ(शुभ)15:07 – 16:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:32 – 17:56
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
- लाभ(शुभ)19:32 – 21:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:08 – 22:43
- शुभ(शुभ)22:43 – 00:19 (16 नव॰)
- अमृत(शुभ)00:19 (16 नव॰) – 01:54 (16 नव॰)
- चर(सामान्य)01:54 (16 नव॰) – 03:30 (16 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:30 (16 नव॰) – 05:05 (16 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:05 (16 नव॰) – 06:41 (16 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
अपनी कुंडली देखें