पंचांग 28 फ़रवरी 2068

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

28 फ़रवरी 2068 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:54
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय03:25 (29 फ़र॰)
चंद्रास्त13:55
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण दशमी 21:34 तक, फिर कृष्ण एकादशी 19:16 (29 फ़र॰) तक
नक्षत्र
मूल 18:34 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 17:04 (29 फ़र॰) तक
योग
सिद्धि 02:36 (29 फ़र॰) तक, फिर व्यतीपात 23:25 (29 फ़र॰) तक
करण
वणिज 10:26 तक, फिर विष्टि 21:34 तक, फिर बव 08:30 (29 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10
  • राहु काल15:43 – 17:11
  • यमगंड09:50 – 11:19
  • गुलिक काल12:47 – 14:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:54 – 08:22
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:22 – 09:50
  • चर(सामान्य)09:50 – 11:19
  • लाभ(शुभ)11:19 – 12:47
  • अमृत(शुभ)12:47 – 14:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:11 – 18:39

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:39 – 20:11
  • लाभ(शुभ)20:11 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:15
  • शुभ(शुभ)23:15 – 00:46 (29 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)00:46 (29 फ़र॰) – 02:18 (29 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)02:18 (29 फ़र॰) – 03:50 (29 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:50 (29 फ़र॰) – 05:22 (29 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:22 (29 फ़र॰) – 06:53 (29 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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