पंचांग 17 अप्रैल 2068

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 अप्रैल 2068 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:15
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय18:44
चंद्रास्तनहीं
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1990 · विक्रम (चैत्रादि) 2125
संवत्सर:
सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
कन्या 13:51 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 20:59 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 22:15 (18 अप्रैल) तक
नक्षत्र
चित्रा 02:53 (18 अप्रैल) तक, फिर स्वाती 04:39 (19 अप्रैल) तक
योग
हर्षण 19:52 तक, फिर वज्र 19:51 (18 अप्रैल) तक
करण
विष्टि 08:12 तक, फिर बव 20:59 तक, फिर बालव 09:40 (18 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:59
  • राहु काल15:43 – 17:17
  • यमगंड09:25 – 10:59
  • गुलिक काल12:34 – 14:08

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:15 – 07:50
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:50 – 09:25
  • चर(सामान्य)09:25 – 10:59
  • लाभ(शुभ)10:59 – 12:34
  • अमृत(शुभ)12:34 – 14:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:17 – 18:52

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:52 – 20:17
  • लाभ(शुभ)20:17 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:08
  • शुभ(शुभ)23:08 – 00:33 (18 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)00:33 (18 अप्रैल) – 01:59 (18 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)01:59 (18 अप्रैल) – 03:24 (18 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (18 अप्रैल) – 04:49 (18 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:49 (18 अप्रैल) – 06:15 (18 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें