पंचांग 2 मई 2068

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 मई 2068 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:06
सूर्यास्त18:56
चंद्रोदय06:20
चंद्रास्त19:42
मास:
वैशाख (अमांत)
संवत:
शक 1990 · विक्रम (चैत्रादि) 2125
संवत्सर:
सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
मेष 20:54 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 21:21 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 19:38 (3 मई) तक
नक्षत्र
भरणी 15:14 तक, फिर कृत्तिका 14:06 (3 मई) तक
योग
आयुष्मान 07:49 तक, फिर सौभाग्य 05:03 (3 मई) तक, फिर शोभन 02:44 (4 मई) तक
करण
किंस्तुघ्न 10:25 तक, फिर बव 21:21 तक, फिर बालव 08:25 (3 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:31 – 14:07
  • यमगंड07:42 – 09:19
  • गुलिक काल10:55 – 12:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:06 – 07:42
  • अमृत(शुभ)07:42 – 09:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:19 – 10:55
  • शुभ(शुभ)10:55 – 12:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:07
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:44
  • चर(सामान्य)15:44 – 17:20
  • लाभ(शुभ)17:20 – 18:56

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:56 – 20:20
  • शुभ(शुभ)20:20 – 21:44
  • अमृत(शुभ)21:44 – 23:07
  • चर(सामान्य)23:07 – 00:31 (3 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (3 मई) – 01:55 (3 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:55 (3 मई) – 03:18 (3 मई)
  • लाभ(शुभ)03:18 (3 मई) – 04:42 (3 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:42 (3 मई) – 06:05 (3 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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