पंचांग 20 जून 2068

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 जून 2068 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय23:07
चंद्रास्त10:24
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1990 · विक्रम (चैत्रादि) 2125
संवत्सर:
सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 11:56 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 09:27 (21 जून) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 14:47 तक, फिर शतभिषा 13:06 (21 जून) तक
योग
विष्कम्भ 17:16 तक, फिर प्रीति 14:12 (21 जून) तक
करण
तैतिल 11:56 तक, फिर गर 22:41 तक, फिर वणिज 09:27 (21 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 13:02परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:36 – 14:15
  • यमगंड07:38 – 09:17
  • गुलिक काल10:57 – 12:36

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)05:59 – 07:38
  • अमृत(शुभ)07:38 – 09:17
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:17 – 10:57
  • शुभ(शुभ)10:57 – 12:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:55
  • चर(सामान्य)15:55 – 17:34
  • लाभ(शुभ)17:34 – 19:13

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:13 – 20:34
  • शुभ(शुभ)20:34 – 21:55
  • अमृत(शुभ)21:55 – 23:15
  • चर(सामान्य)23:15 – 00:36 (21 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:36 (21 जून) – 01:57 (21 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:57 (21 जून) – 03:17 (21 जून)
  • लाभ(शुभ)03:17 (21 जून) – 04:38 (21 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:38 (21 जून) – 05:59 (21 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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