पंचांग 8 अक्टूबर 2069

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 अक्टूबर 2069 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदय01:23 (9 अक्टू॰)
चंद्रास्त13:39
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1991 · विक्रम (चैत्रादि) 2126
संवत्सर:
विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मिथुन 08:53 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 01:48 (9 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण दशमी 01:52 (10 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 14:55 तक, फिर पुष्य 15:21 (9 अक्टू॰) तक
योग
शिव 19:05 तक, फिर सिद्ध 17:53 (9 अक्टू॰) तक
करण
तैतिल 13:59 तक, फिर गर 01:48 (9 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 13:46 (9 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45
  • राहु काल15:19 – 16:48
  • यमगंड09:24 – 10:53
  • गुलिक काल12:21 – 13:50

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:53
  • लाभ(शुभ)10:53 – 12:21
  • अमृत(शुभ)12:21 – 13:50
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:50 – 15:19
  • शुभ(शुभ)15:19 – 16:48
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:48 – 18:17

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:17 – 19:48
  • लाभ(शुभ)19:48 – 21:19
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:19 – 22:50
  • शुभ(शुभ)22:50 – 00:21 (9 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:21 (9 अक्टू॰) – 01:53 (9 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:53 (9 अक्टू॰) – 03:24 (9 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (9 अक्टू॰) – 04:55 (9 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:55 (9 अक्टू॰) – 06:26 (9 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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